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: बनबसा के ग्लोरियस एकेडमी में नेपाली तथा स्थानीय कवियों ने बिखेरी छटा

admin

Mon, Sep 9, 2024

संवाददाता/ कुंदन बिष्ट बनबसा

बनबसा : ग्लोरियस एकेडमी में नेपाली तथा क्षेत्रीय कवियों के द्वारा रचनाएं पेश की गई।

उत्तराखंड आंदोलनकारी, कवि, सामाजिक कार्यकर्ता, सूबेदार मेजर (रिटायर्ड) स्व. टीकाराम पाण्डेय एकाकी की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर ग्लोरियस अकैडमी विद्यालय बनबसा में वृहद काव्य गोष्ठी तथा मुशायरे का आयोजन किया गया । जिसमें पड़ोसी देश नेपाल, टनकपुर, चकरपुर, बनबसा, खटीमा, पीलीभीत से दो दर्जन से अधिक कवि तथा शायरो ने भाग लिया । कार्यक्रम का शुभारंभ पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ तथा राम रतन यादव 'रतन' ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गुणों का उत्तम, प्रसार दो माँ, हमारे अवगुण निबार दो माँ भटक रहे हैं  तिमिर में गहरे,अज्ञानता से उबार दो माँ !

ग्लोरियस एकेडमी प्रबंधक एवं आयोजक रविन्द्र पांडेय 'पपीहा' ने अपने पिता की कुछ काव्य रचनाओं को प्रस्तुत किया एवं उनके जीवन के कुछ संस्मरणों को साझा किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता नेपाल से पधारे गुगुल्डि वाड्ंमय प्रतिष्ठान, महेंद्रनगर के अध्यक्ष वीर बहादुर चंद 'विश्राम' द्वारा की गई। कार्यक्रम का संचालन पीलीभीत से पधारे सत्यपाल सिंह 'सजग'  द्वारा किया गया तथा उन्होंने अपने संचालन से सभी का मन मोह लिया। शायरो मे  न जाने कितने ग़म सहकर लुटाते प्यार बच्चों पर, पिता का प्यार तो, संसार में अनमोल होता है, राम रतन यादव 'रतन', खटीमा । दरिया में बहाव ना हो तो दरिया की रवानी नहीं कहते  - राम चंद्र प्रजापति 'दद्दा', खटीमा ।

कथा भागवत सुन लो माला जप लेना हर दम, सत्कर्मों के बल पर ही हो पाते संकट कम - त्रिलोचन जोशी खटीमा, ■■■■

घर में जन्नत का सुख पाऊं, फिर क्यों मंदिर - मस्जिद जाऊं, नीरज सिंह टनकपुर,■■■■

झंझावत जब झकझोरे पथ में चाहे हो भय त्रास की आंधी मम डॉ नीलम पाण्डेय खटीमा,■■■■

मैं कोई आम नागरिक नहीं नेता हूं,बस चुनाव में ही दर्शन देता हूं। शांति देवी 'शांति' चकरपुर■■■■

फिर भी टूटी इस सरगम से जीवन का संगीत लिखा है हमने उनको मनमीत लिखा है  हेमा जोशी ' परू', खटीमा■■■■,

तू  प्रीत भी मन प्रीत भी बहार भी गुलजार भी, हर कदम तू साथ मेरे  करता हैं मनुहार भी दीपक फुलेरा ' बेबाक चकरपुर,■■■■

नेता बुलेट प्रूफ गाड़ियों में मौज उड़ाते हैं, सीमाओं पर सैनिक नंगी छातियों पर गोली खाते हैं। प्रकाश गोस्वामी 'आक्रोश', बनबसा,■■■■

पत्थर ही सही लगा हूं तराशने में खुद को। कुछ बन जाऊंगा तो मेरी भी कीमत होगी - रविन्द्र पाण्डेय 'पपीहा', बनबसा,■■■■

ज़हर के चिज़ हो आंसू पिएका छन कथा मेरा।

कविराज भट्ट, कंचनपुर, नेपाल ।■■■■

अंत में कार्यक्रम के अध्यक्ष वीर बहादुर चंद ने समस्त कार्यक्रम की समीक्षा की तथा बलि प्रथा, नशा एवं अन्य कुरीतियों पर प्रहार किया।

कार्यक्रम में पंकज मुरारी, मदन मौनी, अनीता कांडपाल, हेमा पाठक, दीपा बिष्ट, पुष्प पुजारा समेत ग्लोरियस परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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