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चंपावत में प्रशासनिक बदलाव की नई मिसाल बने जिलाधिकारी मनीष कुमार : संवेदनशील कार्यशैली, जनता दरबार और त्वरित निर्णयों से छह माह में जीता आमजन का विश्वास

Abid Hussain

Tue, Dec 30, 2025

चंपावत। वर्ष 2025 के जून माह का तीसरा सप्ताह चंपावत जिले के प्रशासनिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में दर्ज हो रहा है। विशेषकर गरीब, वंचित और सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए यह समय प्रशासनिक संवेदनशीलता और भरोसे की नई शुरुआत लेकर आया है। इस सकारात्मक परिवर्तन के केंद्र में जिलाधिकारी मनीष कुमार की कार्यशैली रही है, जिन्होंने अपने कार्यकाल के मात्र छह माह में ही प्रशासन को जनोन्मुखी और परिणामकारी दिशा प्रदान की है।

चंपावत और सीमांत जनपदों के प्रशासनिक इतिहास में कुछ जिलाधिकारी ऐसे रहे हैं, जिन्हें उनकी संवेदनशीलता और प्रभावी कार्यप्रणाली के लिए आज भी याद किया जाता है। वर्ष 1985 में पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी रहे विजैन्दर पौंल तथा वर्ष 2004 में चंपावत में तैनात गोपाल कृष्ण द्विवेदी ऐसे ही उदाहरण हैं। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि वर्तमान जिलाधिकारी मनीष कुमार की कार्यशैली उसी सकारात्मक परंपरा को आगे बढ़ाती प्रतीत हो रही है।

आज के समय में, जब प्रशासन पर आमजन से दूरी के आरोप अक्सर लगाए जाते हैं, वहीं डीएम मनीष कुमार ने अपनी सक्रियता और संवेदनशील दृष्टिकोण से एक अलग पहचान बनाई है। वे प्रतिदिन औसतन 14 घंटे तक कार्यालय और क्षेत्र में रहकर प्रशासनिक कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। फरियादियों को सम्मानपूर्वक सुनना, संवाद के माध्यम से समस्याओं को समझना और त्वरित निर्णय लेकर समाधान करना उनकी कार्यशैली की प्रमुख विशेषताएं बन चुकी हैं।

जिलाधिकारी के नेतृत्व में जिले के प्रशासनिक अमले की कार्यप्रणाली में भी स्पष्ट परिवर्तन देखने को मिल रहा है। जो समस्याएं पूर्व में लंबे समय तक लंबित रहती थीं, उनका निस्तारण अब समयबद्ध और पारदर्शी ढंग से किया जा रहा है। इससे आम जनता और प्रशासन के बीच विश्वास का स्तर उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है।

कार्यभार संभालते ही डीएम मनीष कुमार द्वारा प्रारंभ किया गया साप्ताहिक जनता दरबार आज प्रशासन और नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का सशक्त मंच बन चुका है। प्रत्येक सोमवार को आयोजित होने वाले जनता दरबार में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि आमजन को अपनी समस्याएं सुने जाने और उनका समाधान होने का भरोसा मिला है।

जिले के प्रबुद्ध नागरिकों—92 वर्षीय वरिष्ठ शिक्षाविद चिरंजी लाल वर्मा, अनुभवी शिक्षक मोती सिंह मेहता तथा समाजसेवी डॉ. एल.डी. ओली—का कहना है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में बहुत कम ऐसे जिलाधिकारी देखे हैं, जिनकी कार्यशैली ने आम जनता पर इतनी गहरी और सकारात्मक छाप छोड़ी हो। उनके अनुसार जिलाधिकारी मनीष कुमार उसी विशिष्ट श्रेणी में शामिल हैं।

डीएम मनीष कुमार की प्रशासनिक दक्षता और कार्यसंस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। अयोध्या से प्रकाशित एक राष्ट्रीय समाचार पत्र द्वारा उन्हें हाल ही में “सफल जिलाधिकारी” के रूप में सम्मानित किया गया है, जो उनके कार्यों की व्यापक स्वीकार्यता का प्रमाण है।

इसके साथ ही, ईमानदार और कर्मठ अधिकारी के रूप में पहचाने जाने वाले अपर जिलाधिकारी के.एन. गोस्वामी का जिले में योगदान प्रशासनिक कार्यों को और अधिक सशक्त बना रहा है। जिलाधिकारी के साथ समन्वय स्थापित कर वे जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

वर्तमान समय में, जब समाज में स्वार्थ और लाभ की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है, ऐसे में जिलाधिकारी मनीष कुमार को मिल रहा जनसमर्थन और आशीर्वाद यह सिद्ध करता है कि जनता का विश्वास अर्जित करना आज भी सबसे बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा उन्हें जिस उद्देश्य और विश्वास के साथ चंपावत भेजा गया था, वह धरातल पर साकार होता दिखाई दे रहा है।

प्रशासन और जनता के बीच बनता यह भरोसे का सेतु आने वाले समय में चंपावत जिले के समग्र विकास के लिए एक मजबूत और सकारात्मक आधार सिद्ध होगा।

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दमदार मिसाल

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