Mon 12 Oct 2026

ब्रेकिंग

draft title

समय पर तैयारी की मांग

ऐतिहासिक फैसलों पर बांटी मिठाई

हुआ था लापता, पुलिस में दर्ज है गुमशुदगी का मुकदमा

गांधी-शास्त्री जयंती पर निकली विधिक जागरूकता रैली

सुचना

: बनबसा मे महिला सशक्तिकरण एवं सम्मान समारोह मे समाज की प्रेरणा स्रोत विशिष्ट कार्य करने वाली 4 महिलाओं को किया गया सम्मानित

admin

Fri, Mar 8, 2024

बनबसा= एससी,/ एसटी शिक्षक एसोसिएशन  उत्तराखंड के जनपद कार्यकारिणी द्वारा ग्राम पंचायत फागपुर में अंतरराष्ट्रीय महिला  दिवस धूमधाम से मनाया गया। एसोसिएशन के बैनर तले  विश्व महिला दिवस के अवसर पर “महिला सशक्तिकरण एवं सम्मान समारोह” मे समाज की प्रेरणा स्रोत विशिष्ट कार्य करने वाली चार महिलाओं को सम्मानित किया गया।

शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में सर्वप्रथम अतिथियों द्वारा ज्ञान के प्रतीक, भारत रत्न डॉ बाबा साहब आम्बेडकर एवं भारत वर्ष की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्री बाई फूले के चित्र पर मार्त्यापण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। तत्पश्चात शिक्षक संगठन के जिला अध्यक्ष एमएल सोनियल ने अतिथियों का स्वागत कर पुष्पगुच्छ भेंट किया।

 कार्यक्रम में प्रदेश कार्यकारिणी द्वारा चयनित महिला सुनीता देवी भोजन माता राजकीय इंटर कॉलेज सूखीढांग,  कमला वेदी प्रवक्ता राजकीय इंटर कॉलेज खेतीखान,  सामाजिक कार्यकत्री गीता विश्वकर्मा अमोडी, एवं पूजा महर नेशनल ताइक्वांडो चैंपियन को प्रशस्ति पत्र एवं बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान प्रवक्ता कमला वेदी के द्वारा लिखी गई पुस्तकों का जैसे बसंत के फूल सहित अन्य पुस्तकों का विमोचन किया गया।

 कार्यक्रम का संचालन जिला महामंत्री सुरेश विश्वकर्मा एवं राकेश कुमार विश्वकर्मा के द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  पूर्व प्रधानाचार्य प्रेम सिंह राजकीय इंटर कॉलेज सूखीढांग रहे। उन्होंने अपने उदबोधन में कहा कि महिलाएं अपनी संतानों के प्रथम गुरू होती हैं।

महिलाएं खुद ही अपने बच्चों में बेटा-बेटी का फर्क न करें, क्योंकि बचपन में इस अंतर का असर नहीं पड़ता। परंतु बड़ा होने पर यह अंतर बड़ा हो जाता है और फिर खुद वे अपने बच्चो में अंतर करने लगता है। और इस अंतर का वीभत्स चेहरा समाज में कई अन्य रूप में दिखाई देता है। इसलिए आज आप अपनी सोच को सशक्त करें कि अपने बच्चों में कभी भी बेटा-बेटी का अंतर नही खींचेंगे उन्होंने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस  पर प्रकाश डालते हुए कहां की महिला दिवस 8 मार्च को मनाने की एक खास वजह है। अमेरिका में कामकाजी महिलाओं ने 8 मार्च को अपने अधिकारों को लेकर आंदोलन करते हुए मार्च निकाला था। जिसके बाद सोशलिस्ट पार्टी ने इस दिन महिला दिवस मनाने का ऐलान किया । बाद में 1917 में पहले विश्व युद्ध के दौरान रुस की महिलाओं ने ब्रेड और पीस के लिए हड़ताल किया। बाद में सम्राट निकोलस ने अपना पद त्याग दिया और महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला।  यह देख यूरोप की महिलाओं ने भी कुछ दिन बाद 8 मार्च को पीस एक्टिविस्टस  का समर्थन करते हुए रैलिया निकाली, इस कारण 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने की शुरुआत हो गई बाद में 1975 में संयुक्त राष्ट्र ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को मान्यता दे दी।

कार्यक्रम में शिक्षक राजाराम पौरी ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। वे सामाजिक, शैक्षिक, आर्थिक, सांस्कृतिक एवं वैचारिक रूप से सशक्त हो रही है। महिलाएं आज न सिर्फ जमीन पर, बल्कि चांद से भी बहुत दूर अंतरिक्ष में अपनी पहुंच बना चुकी हैं। उन्होंने आईएस अरुण विश्वकर्मा की उपलब्धियों का गुणगान करते हुए। क्षेत्र के लोगों से सीख लेने की बात कही है।

शिक्षक संगठन के मंडलीय महामंत्री कुमाऊं सुनील कुमार टम्टा ने कहा कि हमारा एसोसिएशन समाज में रचनात्मक कार्य करने में विश्वास रखता है। आज हम इस समारोह में हमारे महिला शक्तियों के द्वारा संचालित विभिन्न समितियों को सम्मान कर रहे हैं। जिसमें उन लोगों ने अपने-अपने क्षेत्रों में विशिष्ट उपलब्धियां हासिल की हैं।

उन्होंने कहा-हमारे एसोसिएशन का कार्य हमेशा से समाज की उन्नत्ति के लिये समर्पित रहता है। कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष बामसेफ हरीश विश्वकर्मा, जिला पंचायत सदस्य किरण देवी, ,  अनिल कुमार, केशव राम, राजाराम पौरी, उमेश चंद्र, मनोज कुमार, चैतराम, गिरधर राम, भावना आर्य, गंगा आर्या, ग्राम प्रधान फागपुर हर्ष बहादुर चंद, खुशाल राम सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र प्रसाद टम्टा सहित तमाम ग्रामीण उपस्थित रहे।

Tags :

जरूरी खबरें