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मनिहारगोठ निवासी वाहन स्वामी सोहेल रजा ने DM से लगाई गुहार, फर्जी : चालान की उच्चस्तरीय जांच की करी मांग

Abid Hussain

Sun, Feb 22, 2026

🚨 सरेंडर वाहन पर 6 माह बाद राजस्थान में चालान! मामला बना चर्चा का विषय

टनकपुर चम्पावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा जनपद चंपावत में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें 1 जून 2025 को विधिवत सरेंडर किए गए वाहन का छह माह बाद दूसरे राज्य में चालान कर दिया गया। मामला वाहन संख्या UK03CA 1757 से जुड़ा है, जिसे0 वाहन स्वामी सोहेल रजा पुत्र गुलाम रसूल, निवासी ग्राम मनिहार गोठ, जनपद चम्पावत ने ए.आर.टी.ओ. कार्यालय टनकपुर में सभी आवश्यक दस्तावेज जमा कर अधिकृत रूप से सरेंडर कर दिया था।

प्रार्थी के अनुसार, वाहन 01 जून 2025 से न तो जनपद में चला और न ही राज्य की सीमा से बाहर गया। इसके बावजूद दिनांक 09 दिसम्बर 2025 को उनके मोबाइल पर एक ई-चालान संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें चालान का स्थान राजस्थान राज्य के ए.आर.टी.ओ. अरोली टोलगेट क्षेत्र दर्शाया गया।

👉👉 सवालों के घेरे में परिवहन व्यवस्था

सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि जब वाहन आधिकारिक रूप से सरेंडर किया जा चुका था, तब राजस्थान में उसका चालान कैसे हुआ? क्या यह फर्जी नंबर प्लेट का मामला है? क्या किसी साइबर अपराधी ने वाहन संख्या का दुरुपयोग किया? या फिर राज्यों के परिवहन डाटाबेस में समन्वय की भारी चूक हुई है?

यह घटना न केवल परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि वाहन स्वामी की कानूनी सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंता उत्पन्न करती है।

👉👉 जिलाधिकारी से सख्त कार्रवाई की मांग

वाहन स्वामी सोहेल रजा ने दिनांक 17 फरवरी 2026 को टनकपुर गांधी मैदान में आयोजित जनता दरबार में जिलाधिकारी चम्पावत को प्रार्थना-पत्र देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आशंका जताई है कि यह मामला साइबर अपराध या फर्जी नंबर प्लेट गिरोह से जुड़ा हो सकता है, जिसकी गहन पड़ताल आवश्यक है।

प्रार्थी ने प्रशासन से अनुरोध किया है कि—

👉 संबंधित ए.आर.टी.ओ. रिकॉर्ड की जांच की जाए

👉 राजस्थान परिवहन विभाग से समन्वय स्थापित कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए

👉 यदि फर्जी नंबर प्लेट या साइबर अपराध की पुष्टि हो तो दोषियों के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए

👀 प्रशासन के लिए परीक्षा की घड़ी

यह मामला प्रशासनिक सतर्कता और विभागीय समन्वय की कसौटी बन गया है। यदि सरेंडर वाहन का भी चालान संभव है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा और रिकॉर्ड प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि इस प्रकरण में कितनी तत्परता और पारदर्शिता से कार्रवाई की जाती है।

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अधिकारियों की लापरवाही

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