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बधाई’ के नाम पर वसूली पर लगे लगाम, नियमावली बनाने की मांग तेज : सरकार से सख्त गाइडलाइन की मांग

Abid Hussain

Sat, Mar 28, 2026

‘बधाई’ के नाम पर वसूली पर लगे लगाम, नियमावली बनाने की मांग तेज

बनबसा। राज्य में शादी-विवाह, जन्मोत्सव, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक अवसरों पर किन्नर समाज द्वारा “बधाई” के नाम पर ली जाने वाली धनराशि को लेकर अब बहस तेज हो गई है। कई स्थानों पर नागरिकों द्वारा यह शिकायत सामने आ रही है कि स्वेच्छा के बजाय दबाव, सामाजिक संकोच या भय के कारण उन्हें अपेक्षा से अधिक राशि देनी पड़ती है। इसी मुद्दे को उठाते हुए सामाजिक कार्यकर्ता सावन चंद रजवार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक और जिलाधिकारी देहरादून को विस्तृत ज्ञापन भेजकर इस पूरी व्यवस्था को नियमबद्ध करने की मांग की है।

ज्ञापन में कहा गया है कि कई मामलों में कुछ लोग बिना अनुमति घरों में प्रवेश कर लेते हैं और अधिक धनराशि के लिए दबाव बनाते हैं। इससे आम नागरिक, विशेषकर महिलाएं और बुजुर्ग, असहज और भयभीत महसूस करते हैं। इस स्थिति को देखते हुए सरकार से मांग की गई है कि स्पष्ट एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) जारी कर यह सुनिश्चित किया जाए कि बिना गृहस्वामी की अनुमति कोई भी व्यक्ति घर में प्रवेश न करे और पहचान के लिए आधार कार्ड व मोबाइल नंबर दिखाना अनिवार्य हो। यदि कोई व्यक्ति जबरन प्रवेश करता है या अभद्र व्यवहार करता है तो उसके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करने और पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का भी प्रस्ताव रखा गया है।

ज्ञापन में यह भी सुझाव दिया गया है कि “बधाई” पूरी तरह स्वेच्छा पर आधारित होनी चाहिए और इसके लिए अधिकतम राशि तय कर दी जाए, ताकि किसी प्रकार का विवाद या दबाव न बने। प्रस्ताव के अनुसार विवाह पर ₹1001, गृह प्रवेश पर ₹1101, जन्म पर ₹1100 और त्योहारों पर ₹101 तक की राशि निर्धारित की जा सकती है। इसके अतिरिक्त किसी भी प्रकार की अतिरिक्त मांग—जैसे कपड़े, आभूषण या अन्य सामान—न करने और न ही इसके लिए दबाव बनाने की बात कही गई है। साथ ही पारदर्शिता के लिए रसीद देने की व्यवस्था लागू करने का सुझाव भी दिया गया है।

शोर-शराबा, ढोलक या ताली बजाकर भीड़ इकट्ठा कर दबाव बनाने को मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में रखने और इस पर भी कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायत के लिए पुलिस हेल्पलाइन 100/105 और सीएम हेल्पलाइन 1905 पर तत्काल सुनवाई सुनिश्चित करने की बात भी ज्ञापन में शामिल है।

इस पूरे मुद्दे को सामाजिक संतुलन के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक ओर आम नागरिकों को किसी भी प्रकार के दबाव या भय से मुक्ति मिलनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर किन्नर समुदाय की पारंपरिक आजीविका और सामाजिक गरिमा का भी सम्मान बनाए रखना जरूरी है। ऐसे में सरकार द्वारा संतुलित, स्पष्ट और व्यवहारिक नियमावली तैयार करना समय की आवश्यकता बन गया है।

सामाजिक कार्यकर्ता सावन चंद् रजवार ने राज्य की सभी ग्राम पंचायतों, नगर निकायों और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि वे भी इस विषय पर अपने-अपने स्तर से ज्ञापन भेजें, ताकि सरकार व्यापक जनमत के आधार पर ठोस निर्णय ले सके। फिलहाल इस मामले में शासन स्तर से कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ती जनचर्चा को देखते हुए जल्द ही इस दिशा में पहल होने की संभावना जताई जा रही है।

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