Tue 25 Aug 2026

ब्रेकिंग

पुलिस की कार्रवाई से मचा हड़कंप

विशेषज्ञ डॉक्टर करेंगे जांच

ग्रामीणों ने जताया आभार

15 पुलिसकर्मी सम्मानित

स्थलीय निरीक्षण

सुचना

रमज़ान में बदली तवज्जो की तस्वीर—तरावीह इमाम को सर-आंखों पर, पांच वक्त : की नमाज पढ़ाने वाले इमाम हाशिए पर!

Abid Hussain

Wed, Mar 18, 2026

देहरादून / रमज़ान के पाक महीने में जहां इबादत का माहौल अपने चरम पर है, वहीं दूसरी ओर कुछ मस्जिदों में एक अलग तरह की चर्चा जोर पकड़ रही है। सूत्रों के मुताबिक प्रदेश के कई इलाकों से ऐसी खबरें सामने आई हैं, जहां तरावीह पढ़ाने वाले इमाम को ज्यादा तवज्जो दी जा रही है, जबकि सालभर नियमित रूप से पांचों वक्त की नमाज अदा कराने वाले इमाम को नजरअंदाज किया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि रमज़ान के दौरान तरावीह की अहमियत के चलते मस्जिदों में तराबी की नमाज पढ़ाने वाले इमामों को विशेष सम्मान, सुविधाएं और आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है। वहीं, कुछ स्थानों पर यह भी देखने को मिला कि स्थायी तौर पर नमाज पढ़ाने वाले इमाम  खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

इस स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा का माहौल है। कई नमाज़ियों का कहना है कि इस्लाम में पांच वक्त की नमाज की अहमियत सबसे ज्यादा है, ऐसे में जो लोग सालभर मस्जिद से जुड़े रहते हैं, उन्हें भी उतनी ही तवज्जो मिलनी चाहिए। वहीं कुछ लोग इसे रमज़ान की विशेष व्यवस्था और परंपरा का हिस्सा मान रहे हैं।

धार्मिक जानकारों का मानना है कि इबादत में भेदभाव की भावना नहीं होनी चाहिए। मस्जिदें एकता और बराबरी का प्रतीक हैं, ऐसे में सभी इबादत करने वालों के साथ समान व्यवहार जरूरी है।

फिलहाल यह मामला अलग-अलग जगहों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। लोगों को उम्मीद है कि मस्जिद कमेटियां इस पर संतुलित और न्यायपूर्ण निर्णय लेंगी, ताकि किसी की भावनाएं आहत न हों और इबादत का माहौल सौहार्दपूर्ण बना रहे।

■■ स्थानीय लोगों ने दी अपनी राय

1- स्थानीय निवासी मोहम्मद सलमान ने बताया कि बढ़ती महंगाई के दौर में इमामों की मौजूदा तनख्वाह बेहद कम है। उनका कहना है कि मस्जिद कमेटियों को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और कम से कम एक इमाम की सैलरी ₹20,000 के आसपास निर्धारित की जानी चाहिए, ताकि वे सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।

■■■■■■■■■■■■■■■■

2- वहीं, मोहम्मद रफीक का कहना है कि इमाम की न्यूनतम सैलरी ₹18,000 होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि ईद के मौके पर एक अतिरिक्त वेतन (बोनस) देने पर भी विचार किया जा सकता है, जिससे इमामों का मनोबल बढ़ेगा और उनकी सेवाओं का उचित सम्मान हो सकेगा।

3- देहरादून निवासी मोहम्मद नोमान ने बताया कि बढ़ती महंगाई के हिसाब से एक इमाम की सैलरी लगभग 20 से 25000 रुपए के आसपास होनी चाहिए उन्होंने मस्जिद कमेटियों से इस मामले पर विचार किए जाने की बात कही है

Tags :

ब्रेकिंग न्यूज़

जरूरी खबरें