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चंपावत: आंगनबाड़ी केंद्रों में राशन वितरण को लेकर उठे सवाल, लाभार्थी : परेशान, संबंधित विभाग के अधिकारी मौन, तो सुनेगा कौन

Abid Hussain

Sun, Feb 15, 2026

टनकपुर / चंपावत। जिले के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती और धात्री महिलाओं को प्रत्येक माह मिलने वाला राशन समय पर न मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। लाभार्थियों का आरोप है कि मासिक वितरण के बजाय उन्हें तीन-तीन महीने का राशन एक साथ दिया जा रहा है, जिससे नियमित पोषण व्यवस्था प्रभावित हो रही है और कई परिवारों को असुविधा का सामना करना पड़ रहा है।

लाभार्थियों का कहना है कि अनियमित वितरण के कारण कभी राशन खत्म हो जाता है तो कभी एक साथ अधिक मात्रा में सामग्री मिलने से उसे सुरक्षित रखना चुनौती बन जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में भंडारण की समुचित व्यवस्था न होने से राशन की गुणवत्ता प्रभावित होने की भी आशंका जताई जा रही है।

वहीं, संबंधित सुपरवाइजर रेखा धोनी ने स्पष्ट किया कि आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को प्रत्येक माह 2 पैकेट खजूर देने की व्यवस्था निरंतर जारी है। उन्होंने बताया कि 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों को टेक होम राशन (टीएचआर) के तहत बाल भोग, दलिया आदि सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है।

इसके अतिरिक्त, 3 से 6 वर्ष तक के पंजीकृत बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों में तैयार भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी संचालित है, ताकि बच्चों को नियमित और संतुलित पोषण मिल सके। इस मामले में मनिहारगोठ आंगनबाड़ी केंद्र 4 की लाभार्थी जेबा अरशद पत्नी मोहम्मद सलमान ने लाभार्थियों को प्रत्येक माह में राशन उपलब्ध कराए जाने की प्रशासन से मांग की है।

हालांकि जमीनी स्तर पर वितरण की समयबद्धता को लेकर सवाल बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रत्येक माह नियमित वितरण सुनिश्चित किया जाए तो पोषण कार्यक्रम का उद्देश्य अधिक प्रभावी ढंग से पूरा हो सकेगा।

अब देखना यह होगा कि विभागीय स्तर पर इस संबंध में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं, ताकि गर्भवती महिलाओं, धात्रियों और नौनिहालों को समय पर पोषण लाभ मिल सके।

प्रशासन से अपेक्षा

पोषण अभियान और महिला-बाल विकास विभाग की योजनाओं का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना है। ऐसे में आवश्यक है कि वितरण व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी व नियमित बनाया जाए।

अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस मामले में जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे और जरूरत पड़ने पर सुधारात्मक कदम उठाए, ताकि चंपावत जिले की गर्भवती महिलाओं, धात्रियों और नौनिहालों को समय पर और नियमित पोषण लाभ मिल सके।

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अधिकारियों की लापरवाही

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