सच बोलने की सज़ा! रोडवेज की कमियां उजागर होते ही विनोद पाठक सस्पेंड : खामियां बताते ही कार्रवाई का मामला बना चर्चा का विषय
Abid Hussain
Fri, Feb 6, 2026
■खामियां बताईं तो कार्रवाई! क्या रोडवेज में सच कहना गुनाह है?■सवाल •• किसका डर सता रहा है?विनोद पाठक का सस्पेंशन चर्चा में
■सच बोलने की कीमत चुकाते नज़र आए विनोद पाठक, सस्पेंशन पर उठे गंभीर सवाल
टनकपुर । उत्तराखंड परिवहन निगम एक बार फिर सवालों के घेरे में है। टनकपुर रोडवेज डिपो में कार्यरत कर्मचारी विनोद पाठक का सस्पेंशन अब महज़ विभागीय कार्रवाई नहीं, बल्कि सच दबाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो विनोद पाठक द्वारा रोडवेज की खामियों, कर्मचारियों के शोषण, ड्यूटी में अनियमितता, बसों की खराब स्थिति, वर्कशॉप में स्पेयर पार्ट्स और मोबिल ऑयल की भारी किल्लत जैसे गंभीर मुद्दों को उजागर किया गया था। यही नहीं, इन समस्याओं को लेकर बात मीडिया तक पहुंची, जिसके बाद अचानक सस्पेंशन की कार्रवाई सामने आई।
अब सवाल यह उठता है कि—
क्या रोडवेज की सच्चाई सामने लाना अपराध बन गया है?
क्या भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं पर आवाज़ उठाने वालों को चुप कराने की यह सोची-समझी रणनीति है?
कर्मचारी संगठनों और स्थानीय लोगों में इस कार्रवाई को लेकर भारी रोष है। उनका कहना है कि अगर किसी कर्मचारी ने जनहित और विभागीय सुधार के लिए आवाज़ उठाई है, तो उसे सम्मान मिलना चाहिए, न कि दंड।
मामला अब सिर्फ एक कर्मचारी के सस्पेंशन का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल बन चुका है। अगर समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन भी खड़ा कर सकता है।अब देखना यह होगा कि परिवहन निगम जवाब देता है या सवालों से बचता है?
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अधिकारियों की लापरवाही